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Monday, April 27, 2020

जहां भी दर्द है



जहां भी दर्द है,
जिंदा जख्म है,
वहां दवा करो,
दुआ भी करो, 
सेवा  सुश्रुषा, पट्टी मरहम करो,
हो सकता है, प्रयास नाकाफी हो,
जख्म ज्यादा, घाव काफी हो,
पर चाहे अदना सा ही क्यों ना हो,
हर मुकम्मल, हर संभव कोशिश,
जरूर करो;
तुम्हारा छोटा प्रयास,
एक मानवीय एहसास,
किसी को मुस्कुराहट दे सकता है;
कुछ ना कुछ तो,
दुख दर्द, कम कर सकता है।
17 अप्रैल 2020

सिर्फ इंसान होना काफी नहीं



सिर्फ इंसान होना,
काफी नहीं,
इंसानियत का भी होना,
बेहद जरूरी है।
इंसानी एहसास,
इंसानी भावनाएं,
संवेदना और अनुभूति,
सौहार्द सहानुभूति,
हंसी खुशी,
आंसू और गम,
जैविक जुड़ाव,
समरसता और संभाव,
होना भी बहुत जरूरी है,
सिर्फ इंसान होना,
काफी नहीं,
इंसानियत का भी होना,
बेहद जरूरी है।

जोर जबरदस्ती,
निंदा नफरत,
ईर्ष्या बैर,
कटुता और कुटिलता,
हिंसा आक्रोश,
जय पराजय,
क्लेश विद्वेष,
प्रतिद्वंदिता और पराभव,
के घात प्रतिघात से,
हमको, हम सबको,
बनाना दूरी है,
केवल इंसान होना,
काफी नहीं,
इंसानियत का भी होना,
बेहद जरूरी है।
17 अप्रैल 2020

तुम मुझे दबा नहीं पाओगे



मुझे पता है,
तुम मुझे पचा नहीं पाओगे,
मुझे दबाने की,
तुम लाख करो कोशिश,
पर तुम्हें भी यह पता है,
कि तुम मुझे दबा नहीं पाओगे।
मेरी आवाज ही,
मेरी पहचान है,
मेरी ताकत है,
मेरा जुनून है,
हर कोशिश कर लो,
मेरी आवाज को, मेरी पहचान को,
छिपाने की,
पर मुझे मालूम है,
तुम छुपा नहीं पाओगे।
तुम मुझे दबा नहीं पाओगे।
डर भय और लालच से,
छल और कपट से,
शक्ति सामर्थ से, 
अनौचित्य हर तरह से,
तुम झुकाओगे,
झुकाने की कोशिश करोगे,
पर गांठ बांध लो,
तुम मुझे झुका नहीं पाओगे;
तुम मुझे दबा नहीं पाओगे,
तुम मुझे डरा नहीं पाओगे।
24 अप्रैल 2020