Followers

Saturday, August 15, 2026

एक नन्हा सा बीज

एक नन्हा सा बीज,
विराट वृक्ष बनता है।

कुछ छिटपुट पानी की बूंदे, 
कुछ अदना सा प्रकाश;
थोड़ी सी धरती की धूल,
हल्की हवा और खुला आकाश; 
ऐसे पाल्य परिवेश में बीज,
पलता, उभरता, संवरता, विशाल वृक्ष बनता है।

धरती के गर्भ में, 
पलता है;
मिट्टी में मिटता है,
टूटता है, बिखरता है;
फिर प्रस्फुटित होता है,
अंकुरित होता है;
नाजुक सुकुमार पौध से, 
मजबूत महाकाय वृक्ष बनता है।

आसान नहीं, 
बीज से वृक्ष का सफर;
अत्यंत शीत ,भयंकर गर्मी,
अंधड़ तूफान, भारी बारिश का कहर;
झुलसता है, कांपता है, झेलता है, संभालता है;
फिर कहीं, एक अदना सा बीज;
छायादार, फलदार वृक्ष बनता है।