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Monday, September 16, 2024

राजस्थानी मंगल गीत

सगरो मंगल गाओ 
आयो म्हारो मेहमान।

फूल बरसाओ सब,
थाल सजाओ सब;
सगरो दीया जलाओ,
आयो म्हारो मेहमान।

बाजे बजाओ सब,
झूमो और गाओ सब;
सगरौ खुशियां मनाओ,
आयो म्हारो मेहमान।

पुलकित मन सब,
हर्षित जन सब;
सगरो रंग सजाओ,
आयो म्हारो मेहमान।

पंछी मगन सब,
धरती गगन सब,
पावन शुभ दिन लायो,
आयो म्हारो मेहमान।

सगरो मंगल गाओ 
आयो म्हारो मेहमान








Friday, July 26, 2024

THE SCHOOL LIFE

 


A child enters into schooling about the age of 5 to 6 years. He spends around 12 years in schooling. About the age of 17 and 18 the child departs from school life.

The age between 5 to 18 is vital.

This school life is important phase of one’s life. This has various developmental phases like physical, mental, emotional and social.

The changes and developments are quite quick and shaky in the personae of the school children. From a family, the child enters in the school world where he encounters the varied situations and people around. The multiple complex trials and errors like circumstances appear before the school child. The child is still immature and inexperienced to tackle such unforeseen events and occurrences in the surroundings.

Here the parents, teachers and stakeholders need to be sensibly and responsibly sensitive towards it. The society and policymakers too must enact the policies and regulations viewing the vitality of the issues. The educationists and academicians must discover innovative ways to make the school life of children memorable, healthy, productive and successful.

Overall, once the foundation of the life is strongly laid, its sure the building will be splendid. We all must pledge to infuse all of efforts and endeavours to obtain the milestones.

Afterall, we shall have a flourishing, beautiful and developed nation.

Be proud to be a nation builder.

Be proud to a teacher to build the future of a nation.

JAY HIND

Thursday, July 25, 2024

विद्यालय पत्रिका सन्देश

 


यह साझा करते हुए मन प्रफुल्लित हो रहा है कि हमारे विद्यालय के कर्मठ शिक्षक और होनहार विद्यार्थी मिलकर अपने अथक और कष्टसाध्य प्रयासों के उपरांत वार्षिक विद्यालय पत्रिका ‘उमंग’ का प्रकाशन कर रहे हैं ।

सुकुमार और अल्पायु नन्हे बालकों और बालिकाओं के लिए विद्यालयी जीवन बेहद ख़ास होता है । उनके जीवन का यही वह महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो उनके भावी सम्पूर्ण जीवन और बेहतर भविष्य का निर्धारक होता है । विद्यालयी जीवन में प्राप्त अनुभव, ज्ञान, प्रेरणा, सीख और कौशल ही उनके उत्तम और प्रभावशाली व्यक्तित्व के निर्माण के साथ-साथ उनके खुशहाल, सफल और सुंदर जीवन का मजबूत आधार होता है । उनको एक जानकार, जिम्मेदार और समझदार नागरिक बनने की आधारशिला और सफल नागरिक बनने की नीव होती है ।

विद्यालय पत्रिका का प्रकाशन एक मुक्तकंठ सराहनीय और उत्कृष्ट पहल है । यह विद्यालय के नूतन कोपलों और कलियों को शानदार खिलखिलाते पुष्प बनने का वृहद अवसर प्रदान करती है । नव खगों के पंखों में ऊर्जा का संचरण कर उन्हं उन्मुक्त गगन में उड़ने का हुनर विकसित करने का मौका प्रदान करती है । उनके अन्दर अन्तर्निहित परम क्षमता को अपरिमित और अनन्त स्वरुप देने की महती भूमिका निभाती है ।

विद्यालय पत्रिका ‘उमंग‘ के प्रकाशन में सहभागी सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को और विशेषकर संपादक मंडल के सम्मानित सदस्यों के काबिलेतारीफ प्रयासों और सराहनीय लगन की मै प्रशंसा करता हूँ ।

विद्यालय पत्रिका ‘उमंग’ की असीम सफलता की कामना करता हूँ और सभी को शुभकामनाएं प्रेषित करता हूँ ।

 

 

 

Wednesday, July 17, 2024

शायद इश्क हुआ है

न जाने क्यों आजकल
खोया सा रहता हूं
किसी ख्याल में
डूबा सा रहता हूं
हर सांस के साथ
हर धड़कन के साथ
कोई एहसास, किसी ख्वाब में
शायद किसी की याद में
समाया सा रहता हूं
क्या कहूं इसे
क्या नाम दूं इसे
मोहब्बत कहते हैं इसे
दिल्लगी कहते हैं इसे
इश्क भी कहते हैं इसे
शायद इश्क हुआ है
ऐसा लगता है
इश्क हुआ है मुझे।
          

Tuesday, June 18, 2024

तेरे खयाल से दूर

तेरे खयाल से दूर
बहुत दूर चला जाऊं
मेरी हर कोशिश 
न मै तुझे याद करूं 
न मै तुझे याद आऊं।

सच कहूं तो मुझे,
तेरी याद बहुत आती है
मुझे सताती हैं
बहुत तडपाती है
ये दर्द न रहे
कुछ ऐसा कर जाऊं।

सोचता हूं ये दर्द
दवा बन जाए
मेरी मोहब्बत
मेरा खुदा बन जाए
कुछ ऐसा हो
तू मेरा दम
मै तेरी दुआ बन जाऊं।

ऐसा नहीं कि 
मुझे तुमसे प्यार नहीं
तुझसे ऐतवार नही
तेरा इंतजार नहीं
कुछ यूं हो 
तू सलामत रहे
मै भी खुश मिजाज रहूं।

तू मेरी रूह में

तू मेरी रूह में
कुछ इस कदर बस गया है
सांस भी लूं
तेरी खुशबू आती है।

मै कहीं भी रहूं
किसी सूरत में रहूं 
तेरे खूबसूरत ख्याल
मेरे ख्वाबों में आते है
दिल की दहलीज पर
तेरी आहट आ ही जाती है।

तेरे चेहरे का नूर
मेरी पलकों में बसते हैं
तेरी बातों का शुरूर
मेरी धड़कन में चलते हैं
मै चाहूं या न चाहूं 
पर तेरी याद आ ही जाती है।

अब तो खुद मै
मेरे वश में नही हूं
न जाने क्या होगा
बड़े कसमकश में हूं
कोई अनहोनी की आशंका
मुझे डरा ही जाती है।

इंतजार तो रहता है।

कुछ भी ही
पर इंतजार तो रहता है।

कभी कभी कोई बात नही,
कभी तो कोई मुलाकात नहीं
कोई काल नही,
कोई मैसेज नहीं;
यह कोई बुराई भी नही,
कोई गलत बात भी नही;
है ढेर सारे काम,
बहुत जिम्मेदारियां;
लोग भी हैं बहुत सारे,
रिश्ते भी कितने सारे;
इस मोहब्बत के अलावा,
इस प्यार से अलग;
पर कुछ भी हो,
इंतजार तो रहता ही है।

इंतजार तो रहता ही है,
बात हो,
कुछ मैसेज ही सही,
कुछ मिनट की काल ही सही;
हाल तो मिल जाता है,
ख्याल की तृप्ति तो हो जाती है;
जो इंतजार की बेचैनी सी होती है,
कुछ शांत तो हो जाती है;
कभी थोड़ा उखड़े हो,
या उदास हो,
थोड़ा नाराजगी हो,
या अनबन ही क्यों न हो;
पर हर हाल में,
हर परिस्थिति में,
इंतजार तो रहता ही है।
इंतजार तो रहता ही है।

Friday, May 24, 2024

मोहब्बत, एब्सोल्यूट बेवकूफी है

मोहब्बत,
सिर्फ एब्सोल्यूट बेवकूफी है,
और कुछ भी नही।

किसी का इंतजार,
किसी से एतबार,
एक बार नही, बार बार।

बात करने की ललक,
मिलने की चाहत,
न मिल पाने का दर्द,
कभी नाराजगी,
कभी बेताबी, कभी बेरुखी;
रूठना और मनाना, 
रोना और रुलाना;
एक बार नही बार बार।

मोहब्बत तो,
हों ही जाती है अक्सर;
कभी एक से,
कभी अनेक से;
झूठ बोलते हैं अक्सर,
खुश करने के लिए,
अच्छा महसूस कराने के लिए।
एक बार नही बार बार।

मै खुदा हूं

मै खुदा हूं
मैं ईश्वर हूं, मै भगवान हूं।

मै समस्त तारे, सितारे,
ग्रह उपग्रह में हूं;
मै पहाड़, नदी, झरने,
जल जंगल हवा बादल में हूं;
मै बृहद खुला आसमान हूं;
मैं ही संपूर्ण ब्रह्माण्ड हूं।

मै तेज हूं, में वेग हूं,
मै गति हूं, मैं ऊर्जा हूं;
मै प्रकाश हूं, मै ओज हूं,
मैं असीम हूं, अगाध हूं,
मै अनंत हूं, प्रगाढ़ हूं;
मै अत्यंत बलशाली हूं,
मै बलवान हूं;
मै सर्वज्ञ हूं, शक्तिशाली हूं,
मै सर्व शक्तिमान हूं।

सबकुछ मुझमें है,
मै सबमें हूं;
सब कुछ मेरा ही रूप है,
मै सबका प्रतिरूप हूं;
गोचर और अगोचर,
अत्यन्त सूक्ष्म, अतीक विशाल;
सब अंतर्निहित है,
सब कुछ अंतःस्थित है;
मै संपूर्ण सृष्टि के,
हर कण कण में विद्यमान हूं।

मेरा न आदि है,
न ही मेरा कोई अंत है;
मै अजन्मा हूं, 
मैं काल के परे हूं, अकाल हूं,
मै अजर अमर हूं, 
मैं बेअंत हूं;
मै व्याधि, विपत्ति से मुक्त हूं,
मै दीनहीन दुर्बलताओं से विमुक्त हूं;
मै हर हाल समचित्त हूं, एक समान हूं।





यह अभूतपूर्व है,

यह अभूतपूर्व है,
ऐसा पहले कभी न हुआ।

यह यकीनन सच है,
हर बार मैंने चाहा,
उसे याद न करूं;
मैने यह भी चाहा,
वो भी मुझे याद न करे;
हर कोशिश की,
हर जुगत आजमाए;
न ही मै उसे याद आऊं,
न ही वो मुझे याद आए;
यह अभूतपूर्व है,
ऐसा पहले कभी न हुआ।

इसलिए नहीं,
कि मुझे उससे नफरत है;
कोई गिला है,
कोई शिकायत है;
बस इसलिए,
कि उसकी खूबसूरत दुनिया है;
खुशियों से भरा,
प्यारा सा, खुशहाल संसार है;
कहीं कोई ग्रहण न लग जाए,
किसी की बुरी नजर न लग जाए।
यह अभूतपूर्व है,
ऐसा पहले कभी न हुआ।

हमेशा मन के कोने में,
एक उलझन सी रही,
कही उसकी पहल,
और मेरी कोशिश,
हमारे लिए संकट न बन जाए,
अनकही अनसोची,
अड़चन बन जाए;
शांत सुचारू चलती जिंदगी,
कहीं उलझन न बन जाए।
यह अभूतपूर्व है,
ऐसा पहले कभी न हुआ।

हजार कोशिशों,
लाखों जुगत के बावजूद;
कि भूल जाऊं उसको,
जुदा कर लूं रास्ते उससे;
मै रहा पूरी तरह विफल,
मै रहा संपूर्ण असफल;
हालते मंजर ये है,
जितना दूर जाने की कोशिश की,
भूल जाने की जुगत की,
उतना ही जादा याद किया,
उतना ही अधिक करीब आया।
यह अभूतपूर्व है,
ऐसा पहले कभी न हुआ।

अब तो ऐसा कोई पल कहां,
जिसमे वो याद न आए;
ऐसा कोई क्षण कहां,
जब बेहद करीब नजर न आए;
मालूम होता है,
है यहीं कहीं, मेरे आसपास;
उसकी आहट,
उसकी खुशबू बिखर रही है,
यही कहीं, मेरे आसपास।
यह अभूतपूर्व है,
ऐसा पहले कभी न हुआ।

मैने भी लड़ना छोड़ दिया,
बिछड़ने के विचार से;
सहज हो गया,
इस वेग को, बहाव को,
अंगीकृत कर लिया,
स्वीकार कर लिया;
बस मुस्कान के साथ,
उद्वेलित मीठे मनोभावों के साथ,
अनूठे एहसास, खूबसूरत आभास के साथ,
अपनी कदमचाल मिला लिया।
यह अभूतपूर्व है,
ऐसा पहले कभी न हुआ।





जब भी देखूं

जब भी मैं देखूं तुझे,
तेरा मुस्कुराता चेहरा नजर आए।
जब भी मैं सोचूं तुझे,
तेरा गुनगुनाता चेहरा नजर आए।

तेरी आंखों की चमक,
ताउम्र सलामत रहे;
तेरे गीतों की झनक,
ताउम्र सलामत रहे;
जब भी मैं पाऊं तुझे,
तू और भी निखरा नजर आए।

तेरे चेहरे, तेरी सांसों में बसे,
एक रूहानी ताजगी;
तेरे हर रोम, तेरी रूह में रहे,
एक जिंदादिल जिंदगी; 
जब कभी मिलूं मैं तुझे,
तू और भी हंसता खिलखिलाता नजर आए।

चांद की चांदनी भी,
तेरी रोशनी को तरसें;
बहारों के फूल भी,
तेरी खुशबू को ललचें;
जब भी ख्वाबों ख्यालों में पाऊं तुझे,
तू और भी सुन्दर विलक्षण नजर आए।

ए नजारे, ए सितारे,
ए चमन, ए फिजाएं,
तेरे नूर, तेरी रौनक की,
एक झलक पाने को अकुलाएं।
जब भी याद करूं मैं तुझे,
आसमां में फैली तेरी दीप्ति, तेरी आभा नजर आए।

ए पहाड़, ए झरने,
ए बादल, ये ठंड हवाएं;
बारिश की टिप टिप बूंदें,
झूमती नाचती नदी की धाराएं;
जब भी मैं देखूं इन्हें,
तेरा सौम्य प्रतिरूप, हर जगह नजर आए।











Monday, May 20, 2024

बहने दे।

वह एक वेग है,
एक बहाव है;
एक धारा है,
गतिमान है, चलायमान है;
ऊर्जावान है वह,
रोक न उसे, टोक न उसे;
उसे अपने भाव में,
उसे अपने स्वभाव में;
अपनी धुन में, अपनी चाल में;
चलने दे उसे, 
बहने दे।

तू क्या है?
तू क्या ही देगा उसे;
क्यों सवाल करता है,
क्यों बवाल करता है;
खूबसूरत हैं उसकी खुद की हस्ती,
शानदार हैं उसका जीवन;
खुशियां, जलसे, उत्सव,
उसके इर्द गिर्द हैं,
आनंद और हर्षोल्लास,
उसके शागिर्द हैं;
मधुर वीना की राग है वो,
अपनी धुन,
अपनी चाल में,
बजने दे उसे।
बहने दे उसे।




Friday, May 10, 2024

कौन है वो

कौन है वो,
मेरे लिए,
आखिर कौन है वो।

मेरा भूत भी नही,
मेरा वर्तमान भी नही,
न ही मेरा भविष्य है वो।
आखिर कौन है वो।

एक चंचल चलायमान,
हवा का झोंका है वो;
जिंदगी के लम्बे सफर में,
खट्टा मीठा साथ और एहसास है वो;
वक्त के विशाल बहाव से टूटा,
एक अदना सा लम्हा है वो;
आखिर कौन है वो।

उसका एक संसार है,
अपना घर परिवार है;
किसी की मां,
किसी की पत्नी है वो;
किसी की बहन,
किसी की पुत्री है वो;
वही हकीकत है,
वही सच्चाई है;
मै क्या हूं,
उसके बृहद बेहतरीन संसार का,
एक मामूली सा टुकड़ा हूं;
उसके वजूद में,
मै मौजूद नही;
आखिर कौन है वो।



मै एंपरर हूं, मै किंग हूं।

मै सम्राट हूं, मै बादशाह हूं;
मै शहंशाह हूं,
मै एंपरर हूं, मै किंग हूं।

कोई व्यक्ति, कोई वस्तु,
कोई बात कोई घटना;
मुझे तोड़ नही सकती,
मरोड़ नही सकती,
मुझे कमजोर नही कर सकती।

कोई मुझे याद करे या न करे,
मुझे गम नही,
कोई मुझे प्यार करे या न करे,
मुझे गम नही;
कोई मेरी फिकर, मेरी परवाह करे या न करे,
मुझे गम नही;
कोई है साथ या नही,
मुझे गम नही।

मै नही चाहता,
कोई मुझपर दया दिखाए,
मुझ पर सहानुभूति दिखाए,
कोई बेचारेपन का एहसास दिलाएं,
कोई सहृदयता के नाम पर,
अफसोस दिखाए;
मै बिल्कुल नही चाहता।

मै बिल्कुल सम्पूर्ण हूं,
सक्षम हूं, शक्तिमान हूं;
बलशाली और बलवान हूं;
ऊर्जा अनंत है मुझसे,
जीवनशक्ति प्रगाढ़ है मुझमें;
मै बेसहारा नही,
मै बेचारा नही;
मै निर्बल और निःशक्त नही।

मुझे गम नही,
पूरी दुनिया बेवफाई करे मुझसे,
नफरत करे मुझसे,
दूरी बनाए मुझसे;
परवाह नही मुझे,
पूरी दुनिया दुश्मनी करे मुझसे,
मै अकेला एक तरफ,
पूरी दुनिया दूसरी तरफ;
न कोई डर,
बिलकुल निर्भीक और निडर।

तू जा, जा चला जा।

तू जा
जा चला जा।
मै तेरे एहसास के सहारे जी लूंगा।
मै तेरी याद के सहारे जी लूंगा।

तू फिकर ना करना मेरी,
याद भी न करना;
आगे बढ़ जाना,
पीछे मुड़कर भी न देखना;
सोच लेना कि,
छोड़ा तो है बहुत कुछ उसके पास,
केवल मैं ही नही हूं,
बाकि तो सबकुछ है उसके पास।

हां तू नही है,
पर बहुत कुछ है;
जो तेरे साथ होने का,
तेरी नजाकत का,
तेरी उन जज्बातों का,
तेरी हर बातों का,
एहसास दिलाएंगे,
याद आयेंगे,
जीने का सहारा बन जायेंगे।

जब मैं बिलकुल अकेला हूंगा,
तुझे याद करके मुस्कुराऊंगा;
खुद से ही,
बातें करूंगा;
गुनगुनाऊंगा तुझे,
गाऊंगा तुझे, 
हर सांस में,
हर धड़कन में,
पाऊंगा तुझे;
नामुमकिन है भूल पाऊंगा तुझे।

तू खुश रहना,
खैरियत से रहना;
अपने साथ और अपनो के साथ।
अपने हर पल को,
खूबसूरती और बेहतरी से जीना;
मुस्कुराहट कायम रखना,
जिंदादिली जिंदा रखना;
मेरी याद खलल न बन जाए,
मुझे याद भी न करना;
मुझे एहसास भी न करना।

कही ऐसा ना हो,
तू याद करे,
मै बेचैन हो जाऊं,
मै अस्थिर,
मै विहवल हो जाऊं;
मै बेकाबू,
मै बेबश हो जाऊं,
कहीं मैं निरीह, निर्बल न हो जाऊं;
तुझसे मिलने का सुरूर,
तुहसे मोहब्बत का जुनून न जाए।

हर पल मैं तेरा,
वो मुस्कुराती तस्वीर देखूंगा;
एक बार नही,
मै बार बार देखूंगा;
तू सलामत है,
तू खैरियत है,
बस यही ख्याल और ख्वाब देखूंगा;
यही सोचूंगा,
तू जहां है, जैसे भी है;
बेहतरीन और बिंदास है;
तुम हो,
तुम्हारे अपने, तुम्हारे साथ हैं;
तुम्हारे आसपास हैं।

Tuesday, May 7, 2024

केवल मुस्कुराइए

 


केवल मुस्कुराइए

पुरे मिठास मासूमियत और दृढ़ता के साथ।

इस विचार के साथ कि,

केवल हमारे साथ ही ऐसा नही हुआ,

केवल पहली बार ऐसा नही हुआ हमारे आसपास,

अक्सर ऐसा होता ही है,

फिर,

हम एक लम्बी गहरी साँस लेते हैं,

और आगे चल देते हैं।

 

यदि कोई बेइम्तिहाँ मोहब्बत करे,

या कोई भयंकर नफरत करे;

तो केवल मुस्कुराइए।

यदि सब आपका अत्यंत सम्मान करते है,

या सभी आपका अपमान करते हैं;

तो केवल मुस्कुराइए।

यदि लोग आपको स्वीकार करते हैं,

या दुनिया आपका तिरस्कार करती है;

तो केवल मुस्कुराइए।

यदि आप सफलता ही प्राप्त करते हैं,

या केवल असफलता ही मिलती है;

तो केवल मुस्कुराइए।

यदि आप शक्ति या समृधि प्राप्त करते हैं,

या सब आभा ऐशो आराम खो देते हैं;

तो केवल मुस्कुराइए।

आप तकलीफ में है या सुख में,

स्थाई मुस्कान रखें,

चेहरे पर,

अपने हाव भाव पर,

हर परिस्थिति, हर माहौल में,

साँसे थामिए, धैर्य रखिये,

देखिये और इंतज़ार कीजिये,

समय के बदलने का,

परिस्थिति परिवर्तित होने का,

लेकिन हर क्षण, हर वेग में,

मत भूलें,

मुस्कुराना,

पुरे मिठास, मासूमियत और दृढ़ता के साथ।

ONLY SMILE

 


Only smile,

With all sweetness, innocence and stableness;

With the idea that,

It’s not only to me,

And nothing new around us;

It happens most often.

Then we take,

Long and deep sigh,

Exhale and inhale,

And we move ahead.

 

If someone loves you a lot,

Or despises you the bitterest;

Only Smile.

If you are honoured by all,

Or humiliated by most;

Only Smile.

If you are accepted by people,

Or rejected by world;

Only Smile.

If you attain all success,

Or if you obtain only failure;

Only Smile.

If you possess all power and prosperity,

Or if you lose all lustre and luxuries;

Only Smile.

 

Be in pain or in pleasure,

Paste permanent Smile,

Over your countenance,

On your face.

In all situations and in every mood,

Hold your breath and have patience,

Wait and watch,

Let the time turns,

And circumstance changes;

But in all moments and momentum,

Never forget,

To smile,

With all sweetness, innocence and stableness.

 

 

Sunday, March 31, 2024

जिंदगी! मैं तेरा शुक्रगुजार हूं



कोई ख्वाइश नही
कोई फरमाइश नही
जिंदगी!
जो भी बक्शा है मुझे
जो भी नवाजा है मुझे
मैं शुक्र गुजार हूं
मैं तेरा शुक्रगुजार हूं

खुश हूं मैं,
जैसे भी हूं जहां भी हूं
संतुष्ट भी हूं
जो भी है, जितना भी है
चाहते कोई शेष नही,
इच्छाएं कोई विशेष नही,
जिंदगी!
तूने बहुत बरकत दी
मैं तेरा तरफदार हूं
तेरा शुक्र गुजार हूं।

अब तो मुश्किलात में भी,
मुस्कुराहट सी रहती है,
ठोकरें, झंझट और उलझने भी,
वरदान से लगते है,
नही महसूस होती कमी,
किसी की, किसी वस्तु की
अपने में ही पूरा 
जमी आसमान
पूरा जहान समाया सा लगता है।

शुक्रिया ये जिंदगी!
तेरी मेहरबानी के लिए
शुक्रिया ये जिंदगी
तेरी मेहरबानी के लिए।

Saturday, March 30, 2024

सब के होते होते हम खुद के न हो सके



पहचान तो मिली और दिया भी
पर खुद को पहचान न सके
सम्मान भी मिला और दिया भी
पर खुद को सम्मान न दे सके
दुनिया बनाई,
लोगो को मनाया, समझाया, रिझाया
पर खुद को रिझा न सके

बगीचे में
मोहब्बत के अनगिनत फूल हमने लगाए
पर अफसोस
हम खुद को ही मोहब्बत से दूरी बनाए
बाहें फैलाए
मैंने सबको अपनाए
गले भी लगाए
पर अफसोस 
खुद को ही गले न लगा सके
खुद को ही न अपना सके।

प्यार बांटता फिरा
इश्क के बाजार में
पर अफसोस
खुद से प्यार न कर सका
झोली का सारा सकून, सारा चैन
उड़ा दिया जमाने पर
पर अफसोस
खुद को चैन सकून न दे सके।

हम वो है जो सब हैं



हम वो नही है जो हम है
हम वो है जो सब है

हम खुद से अंजान है
खुद से बेगाने है
खुद से दूर है
बहुत दूर हैं
हम ख़ुद को जानते नही
खुद को पहचानते नहीं 
किसको पता है कि
कौन क्यों कैसे कब है

ये नाम, ए रिश्ते नाते
पद प्रतिष्ठा, सुख वैभव
सोच विचार, वाणी व्यवहार
सब आरोपित है
सब प्रत्यारोपित है
प्रदत्त है, सृजित है, विकसित है
हमारे आसपास से
आसपास के व्यक्तियों से, वस्तुओं से।
सब कुछ काल्पनिक है,
सब कुछ करतब है।

सब छद्म है सब अवास्तविक है
अस्थाई है आभासी है
सब छलावा है, दिखावा है
भ्रम है, मायाजाल है
जो है वह दिख नही रहा,
जो दिख रहा, वह है नही
उछल कूद शोक और सुख 
सब मरघट का जमघट है।